अक्षय तृतीया का हिन्दू संस्कृति में बड़ा महत्व हैं. यह पर्व वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता हैं. इस दिन किये जाने वाले शुभ कार्य का फल अक्षय होता हैं. इस दिन दिए जाने वाले दान का भी बहुत महत्व हैं. ऐसा माना जाता है की इस दिन दिया जाने वाला दान
विस्तृत विवरणखगोलशास्त्र के सिद्धांतानुसार ९ या ९ से कम अंशांतर की दूरी पर सूर्य के समीप जाकर शुक्र अस्त हो जाता है। किन्तु ५ मई को शुक्रास्त होने से २४ कला और ३८ विकला की दूरी शेष है। इसलिए उस दिन शुक्रास्त नहीं होगा।
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