रत्न प्रकृति-प्रदत ईश्वरीय उपहार हैं. सनातन काल से ज्योतिष में ग्रह-दोष के निवारणादि हेतु रत्न धारण करने की परम्परा चली आयी हैं. कुंडलीनुसार सही और निर्दोष रत्न धारण करना ही फलदायक होता हैं. यदि रत्नों में किसी प्रकार का दोष हो अथवा कुंडली के अनुसार यदि सही रत्न
विस्तृत विवरणस्नायु तंतुओं में क्षीणता आने पर रुद्राक्ष के चूर्ण, मोती तथा मूंगे की भस्म का सामान रूप से मिश्रण तैयार कर प्रतिदिन नियमित रूप से २ ग्राम की मात्रा का सेवन करने से बहुत ही लाभ होता है. रुद्राक्ष के चूर्ण को तुलसी की डंडी के चूर्ण के साथ मिश्रण का शहद के साथ नियमित रूप में सुबह
विस्तृत विवरणयह यंत्र लॉकेट चांदी में बना हुआ होता। इस यंत्र को धारण करने से आय के स्रोतों में वृद्धि होती है। व्यापार में वृद्धि होती है।
विस्तृत विवरणनगरों मैं निवास करने वेल सभी लोगों के लिए वास्तुशास्त्र के संपूर्णा नियमों के अनुसार बना घर खरीदना आज की परिस्थितियों के अनुसार असंभव सा हो गया हैं.
विस्तृत विवरणकिसी भी रूप में शनि से प्रभावित लोग कुछ मंत्रों, रत्नों या यंत्रों का प्रयोग कर शनि की अनुकूलता या कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
विस्तृत विवरणचांदी धातु से बने यंत्र अधिक शुभ व शीघ्र फलदायी होते है. यंत्रों से जीवन में आने वाली समस्त विध्न- बाधाओं का शमन होता है. यंत्रों कों धन,समृद्धि, सफलता, यश, मान, व्यवसाय, व्यापार, शिक्षा प्राप्ति और आय स्त्रोतों में वृद्धि के लिए प्रयोग किया जाता है. यंत्रों की विधिवत स्थापना विधि और फलों कों इस लेख में पढ़ सकते है...
विस्तृत विवरणनवरत्न माला, शालीग्राम एवं स्फटिक शिवलिंगी की पूजा अराधना कर आयु, आरोग्यता, ध्न, पद प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
विस्तृत विवरणगोमती चक्र, लोहे का छल्ला, काले रंग के घेड़े की नाल, नजर दोष लॉकेट आदि ज्योतिषीय सामग्री को प्रयोग करने के उपाय एवं उनके फलों पर दृष्टि विचार
विस्तृत विवरणसंपूर्ण काल सर्प यंत्र में अन्य कई यंत्रों को समाहित किया गया है जो राहु केतु की समस्त नकारात्मक स्थितियों को परिवर्तित करके सकारात्मक परिणाम प्रदान करते हैं।
विस्तृत विवरणरत्न माला अनेक ज्योतिषीय सामग्रियों में से एक है। इस लेख में विभिन्न प्रकार की मोती माला, रूद्राक्ष माला, माणिक माला तथा नवरत्न माला आदि के बारे में विषेष जानकारी देकर उनसे होने वाले लाभ के बारे में बताया गया है।
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