मकर संक्रांति का पर्व पूरे भारत में विभिन्न नामों, मान्यताओं एवं विधि से मनाया जाता है। इसको मनाने की विस्तृत विधि, मान्यताओं एवं आधुनिक परिवेश में ज्योतिषीय, पौराणिक एवं धार्मिक महत्व का वर्णन।
विस्तृत विवरणअश्विनी, मघा, मूल, आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती नक्षत्र गंडमूल नक्षत्र कहलाते है. इन नक्षत्रों में जन्म लेना जातक के लिए अरिष्टकारी माना जाता है. गंडमूल नक्षत्रों का जातक पर क्या प्रभाव हो सकता है. इस प्रभाव कों कौन से उपायों से दूर किया जाता है. इन उपायों कों करने की विधि इस लेख में पढ़ी जा सकती है...
विस्तृत विवरणराहु केतु के फलकथन का आधार क्या होना चाहिए और जीवन की लंबी अवधि के कितने वर्ष इन छाया ग्रहों से प्रभावित रहते हैं तथा किन ग्रह योगों के साथ ये शुभ या अषुभ फल देते हैं तथा विभिन्न स्थितियों में राहु और केतु की दषा क्या फल प्रदान करती है इसके बारे में उदाहरण कुंडलियों की सहायता से परिस्थितियों का विस्तृत विष्लेषण किया गया है।
विस्तृत विवरणहस्तरेखा द्वारा विवाह के संभावित समय और वैवाहिक जीवन के स्वरूप और विवाह रेखा की शाखाओं तथा विभिन्न प्रभाव रेखाओं के बारे में सविस्तार जानने के लिए यह लेख विषेष रूप से उपयोगी है। वर- वधु का मिलान भी इस आधार पर किस तरह किया जाता है तथा विवाह की दिषा क्या होगी इसके बारे में भी इस लेख से जाना जाता है।
विस्तृत विवरणशिक्षा प्राप्ति के बाद कार्य क्षेत्र में प्रवेश करने से पूर्व प्रशासन के क्षेत्र में उच्च पद प्राप्ति की महत्वाकांक्षाओं को पूर्ण करने में किन ज्योतिषीय योगों से मार्गदर्शन और सहायता प्राप्त की जा सकती है। आइए, जानें उन योगों के बारे में
विस्तृत विवरणभारत और विश्व का सामाजिक आर्थिक और राजनैतिक भविष्य आगामी वर्ष 2011 में कैसा होगा। आइए जानें मेदिनीय ज्योतिष के आधार पर।
विस्तृत विवरणपुराणों के अनुसार शिशु को दीर्घायु बनाना, उसका रक्षण और भरण-पोषण करना भगवती षष्ठी देवी का स्वाभाविक गुण है. नंदराय जी एवं यशोदा ने जगत के पालक श्री कृष्ण के जन्म के छठे दिन अपने पुत्र के अरिष्ट निवारनार्थ ब्राह्मणों को बुलाकर भगवती षष्ठी....
विस्तृत विवरणजब घर में किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तब हिंदू मान्यता के अन्सुआरा मुख्यत: चार प्रकार के संस्कार कर्म कराए आजाते है. मृत्यु के तुरंत बाद, चिता जलाते समय, तेरहवीं, एक समय व बरसी के समय हिंदू धर्म में मान्यता है की मृत्यु के पश्चात व्यक्ति स्वर्ग चला...
विस्तृत विवरणविवाह में गोधूली मुहुर्त का अपना महत्व है. धार्मिक मान्यताओं ने यह पूजनीय है. ज्योतिष् के अनुसार इसे शुक्र ग्रह का प्रतीक माना गया है. जो दाम्पत्य सुख का कारक ग्रह है. संध्यासमय चारा चरकर लौटती गायों के खुरों से उड़ती धूल प्रदूषित वायु मंडल कों स्वच्छ करती है...
विस्तृत विवरणएक व्यक्ति अपना भाग्य सात्विक क्रियाओं के द्वारा बदल सकता है. भाग्य कभी भी निर्धारित नहीं है. हमारे वर्तमान कर्म ही भाग्य कों अच्छे कर्मफल की सीमा में बदल सकते है. प्रश्नशास्त्र का आधार प्रश्नकर्ता के मन में जिज्ञासा का जन्म होना है.....
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