जातक की कुंडली से कैसे जानें कि उसकी विद्याध्ययन में रूचि होगी और वह मेधावी छात्र बन पाएगा कि नहीं? शिक्षा में अवरोध उत्पन्न करने वाले क्या कारण है ? उनके उपाय और उच्च शिक्षा में सफलता प्राप्ति हेतु क्षेत्र का चुनाव आदि विषयों की जानकारी प्रस्तुत लेख में दी गई है।
विस्तृत विवरणसर्वार्थ चिंतामणि के अनुसार विद्या कारक बृहस्पति और बुद्धि कारक बुध दोनों एक साथ हों अथवा एक-दूसरे से दृष्ट हों तो भी जातक राजा अथवा एक – दूसरे से दृष्ट हों तो भी जातक राजा अथवा जनता से बहुत ।
विस्तृत विवरणनील सरस्वती की आराधना से विद्यालाभ में उत्पन्न होने वाले व्यवधान दूर होते है। छात्र ऊंचे प्रतिशत से परीक्षा पास करते है। अतः प्रतियोगिता परीक्षा में उच्च स्थान प्राप्त करते है। वागीश्वरी सरस्वती की मंत्र साधना से वाणी की सिद्धि होती है।
विस्तृत विवरणपंचमेश यदि छठे, आठवें या बारहवें स्थान में हों, अथवा पंचमेश पाप ग्रहों के साथ हो, तो विद्या भंग योग बनता है। ऐसे जातक के अध्ययन में बाधा अवश्य आती है, विशेष कर उन पाप ग्रहों की दशा – अंतर्दशा में, जिनसे युति हो रही हो।
विस्तृत विवरणस्वस्थ्य शरीर में स्वस्थ्य बुद्धि और मन रहता है। इसलिए शरीर का स्वस्थ्य रहना पहली शर्त है। यदि लग्नेश पाप ग्रहों से युक्त दृष्ट होकर ६, ८, १२ भावों में स्थित हो तो जातक रोगी रहता है। या लग्न में पाप ग्रह हों और लग्नेश निर्बल हो तो जातक रोगी।
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