रोग-शोकादि के निवारणार्थ तथा धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष रुपी पुरुषार्थो की प्राप्ति हेतु इस दिन प्रात:काल में दैनिक क्रियाकलापों से निवृत होकर बिना कुछ ग्रहण किये, सूर्य नारायण भगवान् व् व्रत के देवता भगवान् विष्णु के अवतार कूर्म भगवान् को प्राणाम कर, निष्काम या सकाम
विस्तृत विवरणइस दिन पांच या सात मिटटी के मटकियों में ही (करवा सहित लाकर मटकियों को)चूना या खड़िया से तथा करवे को हल्दी से रंगाकर सुखाकर बालक तथा दो माताओं का चित्र सही पर बनावें. मटकियों को चारों और तथा करवे को मध्य में रखकर सभी पात्रों को विभिन्न
विस्तृत विवरणसंपदा व्रत कथा- राजा नल अपनी पत्नी दमयंती के साथ बड़े प्रेम से राज्य करता था. होली के अगले दिन एक ब्रह्माणी रानी के पास आई. उसने गले में पीला डोरा बांधा था. रानी ने उससे डोरे के बारे में पूछा तो वह डोरे के बारे
विस्तृत विवरणअविघ्नकर व्रत का पालन फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी को करने का विधान है। इस व्रत को सभी देवगणों, मनीषियों, संतों आदि ने भी मनोवांछित कामनाओं की पूर्ति हेतु किया है।
विस्तृत विवरणसूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो सूर्य के इस संक्रमण को मकर संक्रांति कहा जाता है। वेदों में सूर्य उपासना को सर्वोपरि बताया गया है। शास्त्रों की मान्यता है कि कलियुग में सूर्य भगवान का पूजन, अर्चन, आराधना, उपासना शीघ्र फलदायी होती है। संपूर्ण जगत में सूर्य भगवान ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जिनका हम साक्षात रूप में प्रतिदिन दर्शन करते हैं।
विस्तृत विवरणपृथ्वी माता के व्रत व पूजन का विशेष महत्व शास्त्रों व पुराणादि में वर्णित है। सभी ने भू देवी का पूजनकर अपने-अने योग्य मनोवांछित फलों को प्राप्त करते हुए जीवन का कल्याण किया है।
विस्तृत विवरणषष्ठी देवी का व्रत प्रत्येक मास में षष्ठी तिथि के अवसर पर यत्नपूर्वक करने व मनाने का विधान है।
विस्तृत विवरणशनि व्रत शुक्ल पक्ष के शनिवार को किया जाता है। व्रतों की संखया 7, 19, 25, 33, 51 होनी चाहिए। शनि व्रत से कुछ सीमा तक राहु दोष भी शांत होता है। ऋण से मुक्ति के लिए व्रत के साथ इस दिन काली गाय जिसके सींग न हो को धास खिलाना अति उत्तम है। अंतिम व्रत के दिन उद्यापन में संक्षिप्त हवन करना श्रेष्ठ है।
विस्तृत विवरणकृष्ण जन्माष्टमी व्रत विशेष रूप से उत्तरी भारत वर्ष में हर्षोल्ल्लास से बनाया जाता है. भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की अष्टमी, बुधवार, रोहिणी नक्षत्र व वृषभ राशि में चंद्रमा स्थित होने पर हुआ था. यह व्रत २०११ में २१-२२ अगस्त के दिन पूरे भारत में मनाया जाएगा. व्रत को करने की सरल विधि और व्रत से मिलाने वाले फलों को आप इस आलेख से जान सकते है. ...
विस्तृत विवरणभगवान श्री विष्णु का तीसरा अवतार वराह रूप था. भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन श्री विष्णु ने वराह रूप में अवतार लिया था. यह दिन वराह जयंती के रूप में मनाया जाता है. वराह भगवान का व्रत करने से उपवासक को सुख-सम्पति प्राप्त होती है. तथा श्रद्धालु का कल्याण भी होता है. आलेख में दी गई व्रत विधि का अनुशरण कर भाग्य को जागृत किया जा सकता है....
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