शिव पुराण में हनुमानजी एवं अन्य शास्त्रों में शिवजी ने बड़ी लीलायें की है। इसी रूप में महेश्वर ने भगवान राम का परम हित किया था। वहीँ सारा चरित्र सभी प्रकार के सुखों का दाता है। जब अत्यंत अदभुत लीला करने वाले गुणशाली भगवान विष्णु ने शिव जी को मोहिनी रूप का दर्शन कराया, तब वे कामदेव के बाणों से आहत हुये और क्षुब्ध हो उठे।
विस्तृत विवरणअवंतिका के श्री काल भैरव मंदिर में जब महावीर हनुमान तथा देवर्षि नारद जी ने प्रवेश किया, तब वहाँ आरती हो रही थी. भक्त नाना प्रकार के वाद्ध्य बजा रहे थे. कुछ भावुक जन ताली बजाते हुए उमंग में झूम रहे थे......
विस्तृत विवरणहनुमान जी हाथ जोडकर विनीत भाव से बोले , प्रभो आप ज्ञान के साकार रूप है. जगत का समस्त ज्ञान आपके ज्ञान – सिंधु की एक बूँद के समान है. आपके ज्ञानमय स्वरूप तक वेदों की भी पहुँच नहीं है. अत: वे सदैव आपकी कृपा-दृष्टि के इच्छुक रहते है...
विस्तृत विवरणहनुमानजी की कृपा प्राप्त करने के लिए के लिए एक विशेष अनुष्ठान प्रयोग किया जाता है. प्रयोग करने से व्यक्ति कों मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है. यह उपाय मंगलवार के दिन किया जाता है. प्रयोग के दिन ब्रह्मा मुहूर्त मेंया सूर्यास्त से पहले उठकर शौचादि से निवृत हो स्नान कर कपडे पहनकर ललाट पर रोली-चंदन ....
विस्तृत विवरणशनिदेव कों इस बात का तनिक भी ज्ञान नहीं था की रघुनाथ के चरणाश्रितों पर काल का प्रभाव नहीं होता. करुणा निधन जिनके ह्रदय में एक क्षण कों भी जाते है, काल की कला वाहन सर्वथा निष्प्रभावी हो जाती है....
विस्तृत विवरणवर्तमान युग में हनुमान साधना तुरंत फल देती है. इसी कारण ये जन-जन के देव माने जाते है. इनकी पूजा-अर्चना अति सरल है. इनके मंदिर जगह-जगह अति सरल है. इनके मंदिर जगह-जगह स्थित है. अत: भक्तों कों पहुँचाने में कठिनाई भी नहीं आती है....
विस्तृत विवरणभगवान शंकर के ग्यारहवें रूद्र अंजनी पुत्र हनुमान जी आज भी पृथ्वी पर विधमान है. उनकी आराधना उपासना से बड़े से बड़े कष्ट दूर हो जाते है. प्राचीन ग्रंथों में महावीर हनुमान के जन्म के अनेक प्रसंग है जिनका संक्षिप्त विवरण यहाँ प्रस्तुत है....
विस्तृत विवरणवेद-पुराणों में हनुमान जी कों अजर –अमर कहा गया है. शास्त्रों में सप्त चिर्न्जिवों का उल्लेख प्राप्त होता है- हनुमान, राजबली, महामुनि व्यास, अंगद, अश्वत्थामा कृपाचार्य और विभीषण. ये सब आज भी इस धरान पर विचरण करते है. इनमें सर्वाधिक पूजनीय श्री हनुमानजी ही है.....
विस्तृत विवरणजब हम हाथ की रेखाओं में ग्रहों का विश्लेषण करते है तो बल, बुद्धि, विद्या के प्रदाता मंगल ग्रह का विशेष विचार करते है. हनुमाना जी कों मनागल का ही दूसरा रुप माना जाता है. हनुमान की शांति, बुद्धि, कर्मशीलता और स्वामिभक्ति से सभी भलीभांति परिचित है....
विस्तृत विवरणऊं पूरी सृष्टि का केंद्र बिंदु है. ब्रह्मा, विष्णु और महेश, इसी ऊँकार में समाए हुए है. इस तरह ऊँकार ही सम्पूर्ण सृष्टि में स्पंदन पैदा करने वाला तत्व है. जिस प्रकार निराकार ब्रह्मा का वाचक साकार रूप के अन्सुआरा ऊंकार का प्रतीक है. ऊंकार किस रूप में एकाकार है आइये जाने.....
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