जब गोचर शनि चंद्र लग्न से चौथे, सातवें व दसवें स्थान में जाता है तो उसे कंटक शनि कहते हैं। साधारण रूप से कंटक शनि मानसिक दुःख की वृद्धि करता है, जीवन को अव्यवस्थित बनाता है और इस प्रकार नाना प्रकार के दुःखों का सामना करवाता है।