लाल-किताब पद्वति में कई भावों के प्रभावों का एक साथ अध्ययन किया जाता है और फलित देखा जाता हैं. इस सूत्र में इसका विस्तार से विचार किया गया हैं. मान लें , खाना नं. १ में कोई एक या एक से ज्यादा ग्रह हैं. लग्न के ग्रहों को लाल-किताब पद्वति में राजा माना जाता हैं. तथा खाना
विस्तृत विवरणलाल किताब के अनुसार किस ग्रह की चाल के समय किस ग्रह की महादशा होगी?
विस्तृत विवरणलाल किताब पद्धति में चंद्र कुंडली का अपना एक अलग महत्व है। इसमें चंद्र कुंडली द्वारा पत्नी और महादशा के बारे में जाना जाता है।
विस्तृत विवरणकिसी भी भवन पर ग्रहों का भी शुभाशुभ प्रभाव अवश्य पड़ता है। लाल किताब के अनुसार वास्तु संबंधी दोषों के निवारण के बारे में इस लेख में उल्लेख है।
विस्तृत विवरणलाल किताब के अनुसार कुंडली में ग्रह जिस प्रभाव का होता है, वह अपना प्रभाव केवल उस वर्ष देगा जिस वर्ष की वह वर्षफल में उस प्रभाव के लिए
विस्तृत विवरणलाल-किताब पद्वती एमन प्रत्येक ग्रह के अपने बनावटी ग्रह माने है। ये बनावटी ग्रह कुछ विशेष बातों पर प्रभाव डालते है। निम्न तालिका द्वारा इसे और स्पष्ट किया गया है। उपरोक्त तालिका में बताये गए बनावटी ग्रहों का उपयोग ग्रहों के अशुभ असर को दूर करने
विस्तृत विवरणलाल किताब के अनुसार जब कोई ग्रह अपने शत्रु ग्रह से पीड़ित होता है तो वह अपने कष्ट दूसरे ग्रह के अशुभ फल के रूप में प्रकट करता है. यह योग कुर्बानी के बकरे की स्थिति कहलाती है. लाल किताब के कुछ महत्वपूर्ण योगों की विवेचना इस लेख में की गई है...
विस्तृत विवरणज्योतिष में ग्रहों के दृष्टि संबंध जातक को शुभ अशुभ फल प्रदान करते हैं। लाल किताब पद्धति में ग्रहों की इन दृष्टियों के साथ साथ कुछ विशेष स्थितियों के बारे में भी कहा गया है। जिनका किसी भी कुंडली के फलित कथन में अपना महत्वपूर्ण स्थान होता है।
विस्तृत विवरणलाल किताब के अनुसार राहु केतु जिस राशि में हे, उस राशि के स्वामी ग्रह के उपाय करने चाहिए। प्रस्तुत लेख में विभिन्न काल सर्प योगों के उपायों की विधि एवं दान पूजा का वर्णन है।
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