महामृत्युंजय मंत्र का प्रयोग बाधा, अरिष्ट, अकाल म्रत्यु आदि से मुक्ति तथा मन की शुद्धि करने के लिए विशष रूप से किया जाता है. इस आलेख में महामृत्युंजय मंत्र जाप विधि, हवन विधि, अनुष्ठान नियम आदि का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है.
विस्तृत विवरणम्रत संजीवनी विद्या महामृत्युंजय मंत्र न केवल प्राचीन काल में प्रयोग की जाती थी. अपितु इस विद्या के कई गुप्त प्रयोग हैं जिनसे कई रोगों की रक्षा, ऋण से मुक्ति, दाम्पत्य सुख, संतान सुख, समृद्धि, यश और विजय की प्राप्ति तथा दारिद्रय का शमन किया जा सकता हैं.
विस्तृत विवरणमहामृत्युंजय मंत्र यथावधि जप करने से साधक दीर्घायु होता है, उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं. तथा व्यक्ति को कठिन से कठिन कार्य में भीं सफलता मिलती हैं. नियमित रूप से महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से साधक ब्रह्मामय हो जाता है. यह मंत्र शत्रुओं से बचाव और रोंग से रक्षा करने में भीं समर्थ हैं. इस लेख में महामृत्युंजय मंत्र की विस्तार से व्याख्या की गयी है.
विस्तृत विवरणमहाम्रत्युन्जय मंत्र के विभिन्न स्वरूपों का उल्लेख हमारे प्राचीन धर्मग्रंथों में मिलता है. इन सबका अपना-अपना महत्व हैं, विशेष स्थिति में इनका विशेष प्रकार से अनुष्ठान किया जाता हैं.
विस्तृत विवरणप्रत्यक्ष रूप से इष्टदेव का अनुग्रह विशेष ही मंत्र है. मंत्र एक अव्यक्त दैवीय शक्ति को अभिव्यक्त करता है. मंत्र को देवता की आत्मा भी कहा गया है. अपने इष्ट देवता से पूर्ण निष्ठा व् विश्वास रखते हुए विधि-विधान से मंत्र का जाप करने पर साधक को सिद्धि, भुक्ति और मुक्ति की प्राप्ति होती है.
विस्तृत विवरणश्री हनुमान जी संजीवनी पर्वत लाते समय कुछ समय के लिए, भगवान राम की नगरी अयोध्या में कुछ समय के लिए रुके थे. ऐसे में श्री हनुमान जी को सभी माताओं की स्थिति से अवगत होते हुए, देवी उर्मिला के कक्ष के निकट से गुजरे थे, कक्ष के निकट से गुजरते हुए, श्री हनुमान जी ने देवी को एक विशेष साधना में व्यस्त पाया. यह संस्मरण बेहद रोचक और भाव विभोर कर देने वाला था.
विस्तृत विवरणमहामृत्युंजय मंत्र का प्रयोग बाधा, अरिष्ट, अकाल म्रत्यु आदि से मुक्ति तथा मन की शुद्धि करने के लिए विशष रूप से किया जाता है. इस आलेख में महामृत्युंजय मंत्र जाप विधि, हवन विधि, अनुष्ठान नियम आदि का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है.
विस्तृत विवरणमहामृत्युंजय मंत्र जाप करने के सामान्य नियमों के साथ साथ इस आलेख में महामृत्युंजय मंत्र की उपासना का महत्व भी स्पष्ट किया गया हैं. महामृत्युंजय मंत्र जाप करने से साधक को किस प्रकार के फल प्राप्त हो सकते है. इसका विश्लेषण भी इस आलेख में किया गया है.
विस्तृत विवरणगंभीर रोगों एवं मृत्युतुल्य कष्टों के निवारणार्थ या ईश्वर प्राप्ति हेतु महामृत्युंजय मंत्र का विधिपूर्वक जप करना चाहिए. यह मृतसंजीवनी मंत्र है. इसे रोगनाशक व् शान्तिदायक मंत्र भी माना गया है.
विस्तृत विवरणमहामृत्युंजय मंत्र जाप करने से व्यक्ति का जीवन सुखमय होता है. उसकी अकाल, मृत्यु से रक्षा होती हैं. साथ ही अग्नि, जल वाहन आदि से होने वाली दुर्घटनाओं से बचाव होता हैं. किसी व्यक्ति को अगर कोई सर्प या बिच्छू काट लेता है, तो यह मंत्र जाप विष के प्रभाव को भी प्रभावहीन करता हैं.
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