वार व्रत | व्रत

व्रतवार व्रत
Planet-Weakly-Vrat-solutions-for-barrier
नवंबर 2008
व्यूस:521

ग्रहबाधा निवारण हेतु सप्तवार व्रत

वारव्रत का महत्व श्रुति, स्मृति एवं पुराणों में विशिष्टता के साथ वर्णित है। सप्ताह के प्रत्येक वार का काल सूर्यदे से अगले सूर्योदय तक रहता है। श्रेष्ठता के अनुसार भी व्रत रखने के लिए वार का क्षय नहीं होता है। किन्तु तिथि नक्षत्र का क्षय अवश्य होता रहता है

विस्तृत विवरण
guruvar-vrat
जून 2008
व्यूस:597

बृहस्पतिवार व्रत

बृहस्पतिवार व्रत किसी भी बृहस्पतिवार से प्रारंभ किया जा सकता है। यदि किसी शुक्लपक्ष से गुरवार को अनुराधा नक्षत्र का योग हो और उस दिन यह व्रत शुरू किया जाए तो अत्यंत फलदायी होता है। बृहस्पतिवार क आराध्य गुरु है। गुरु का तात्पर्य ऐसी दिव्य शक्ति से है जो।

विस्तृत विवरण
Mangal-Vaar-Vrat
फरवरी 2008
व्यूस:549

मंगलवार व्रत

मारुती नंदन से प्रार्थना करें की वह इस धर्म कार्य में आपको बल प्रदान करें। संकल्पोपरांत वायुनंदन का षोडशोपचार पूजन करें। पूजा में विशेषकर लाल पुष्प, सिन्दूर, लाल वस्त्र व् आटे का चूरमा बनाकर अर्पित करें। स्वयं भी लाल वस्त्र ही ।

विस्तृत विवरण
The-majesty-of-spring-Somwari-Vrat
जुलाई 2007
व्यूस:447

सावन में सोमवारी व्रतों का महात्म्य

बारह मासों में सावन मास में ही शिवपूजन सबसे अधिक होता है। सावन मास में देश भर के शिवालय श्रदालुओं से पट जाते है। भगवान शंकर ने स्वयं अपने श्री मुख से ब्रह्माजी के मानस पुत्र सनतकुमार सावन मास की महिमा इस प्रकार बताई थी।

विस्तृत विवरण