वारव्रत का महत्व श्रुति, स्मृति एवं पुराणों में विशिष्टता के साथ वर्णित है। सप्ताह के प्रत्येक वार का काल सूर्यदे से अगले सूर्योदय तक रहता है। श्रेष्ठता के अनुसार भी व्रत रखने के लिए वार का क्षय नहीं होता है। किन्तु तिथि नक्षत्र का क्षय अवश्य होता रहता है
विस्तृत विवरणबृहस्पतिवार व्रत किसी भी बृहस्पतिवार से प्रारंभ किया जा सकता है। यदि किसी शुक्लपक्ष से गुरवार को अनुराधा नक्षत्र का योग हो और उस दिन यह व्रत शुरू किया जाए तो अत्यंत फलदायी होता है। बृहस्पतिवार क आराध्य गुरु है। गुरु का तात्पर्य ऐसी दिव्य शक्ति से है जो।
विस्तृत विवरणमारुती नंदन से प्रार्थना करें की वह इस धर्म कार्य में आपको बल प्रदान करें। संकल्पोपरांत वायुनंदन का षोडशोपचार पूजन करें। पूजा में विशेषकर लाल पुष्प, सिन्दूर, लाल वस्त्र व् आटे का चूरमा बनाकर अर्पित करें। स्वयं भी लाल वस्त्र ही ।
विस्तृत विवरणबारह मासों में सावन मास में ही शिवपूजन सबसे अधिक होता है। सावन मास में देश भर के शिवालय श्रदालुओं से पट जाते है। भगवान शंकर ने स्वयं अपने श्री मुख से ब्रह्माजी के मानस पुत्र सनतकुमार सावन मास की महिमा इस प्रकार बताई थी।
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