ध्यान आध्यात्मिक जीवन का सबसे प्रमुख अंग है। अत: उसके अनुकूल प्राकृतिक दृश्य जैसी बाह् परिस्थितिथियां वांछनीय है। ध्यान के लिए एक ऐसा स्थान चुन लेना चाहिए जहां केवल ध्यान किया जाए। स्थान शांत और शब्दरहित होना चाहिए।
विस्तृत विवरणमेडिटेशन शब्द को भारत में ठीक उस अर्थ में नहीं समझा जाता जैसा पाश्चात्य देशों में समझा जाता है। वेदांत में एक अन्य समानार्थक शब्द का प्रयोग किया जाता है, जो उसके वास्तविक अर्थ के अत्यंत निकट आता है। वह है ध्यान अथवा निदिध्यासन या संभवत: उपासना
विस्तृत विवरणयह स्वाभाविक है की निष्ठापूर्वक लंबे समय तक ध्यानाभ्यास करने वाले लोग अपनी प्रगति की समीक्षा करना चाहेंगे। आत्म विश्लेषण करने पर बहुत लोगों को यह लगता है की बहुत वर्षों ता अभ्यास करने पर भी वे लक्ष्य की और अधिक नहीं बढ़ पाए है।
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