वैदिक ज्योतिष के अनुसार जन्मकुंडली का षष्ट भाव रोग, ऋण, चिंता का भाव है. छठा भाव त्रिक भाव है, शास्त्रों में इस भाव कों दुस्थानों में रखा गया है. और शास्त्रों में सूर्य कों क्रूर ग्रह माना गया है. षष्ट भाव का सम्बन्ध सूर्य से होने पर व्यक्ति के शत्रु शक्तिशाली होते है. तथा शत्रुओं का बली होना व्यक्ति के जीवन के कष्ट बढाता है.
विस्तृत विवरणवैदिक ज्योतिष के अनुसार जन्मकुंडली का षष्ट भाव रोग, ऋण, चिंता का भाव है. छठा भाव त्रिक भाव है, शास्त्रों में इस भाव कों दुस्थानों में रखा गया है. और शास्त्रों में सूर्य कों क्रूर ग्रह माना गया है. षष्ट भाव का सम्बन्ध सूर्य से होने पर व्यक्ति के शत्रु शक्तिशाली होते है. तथा शत्रुओं का बली होना व्यक्ति के जीवन के कष्ट बढाता है....
विस्तृत विवरणअस्त ग्रह क्या है? कोई भी ग्रह सूर्य से एक निश्चित अंश में आने पर अस्त हो जाता है। किसी ग्रह के अस्त होने का अर्थ है। की वह सूर्य के इतने निकट हो जाता है की उसके तेज और ओज में छिप जाता है और क्षितिज पर दृष्टिगोचर।
विस्तृत विवरणखगोलीय दृष्टिकोण – सूर्य के इर्द –गिर्द चक्कर लगाने वाले ग्रहों में बुध का स्थान प्रथम है। क्योकिं बुध की कक्षा अन्य सभी ग्रहों की तुलना में सूर्य के सबसे अधिक निकट है। सूर्य से बुध की औसतन दूरी ३६०००००० अधिकतम ४३०००००० और न्यूनतम २८०००००० मील है।
विस्तृत विवरणगोचर ग्रह परिवर्तन : इस मास ग्रहों का राशि परिवर्तन इस प्रकार होगा। सूर्य १४ जनवरी को शाम के ६ बजकर ६ मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेगा। मंगल ८ जनवरी की रात को ८ बजाकर १० मिनट पर धनु राशि में प्रवेश करेगा।
विस्तृत विवरण