सभी मानव जो भाग में मोक्ष, दोनों की कामना करते है उन्हें रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिए. रुद्राक्ष की उत्पति शिवजी के आंसुओं से हुई हैं. इसलिए रुद्राक्ष धारण करने से धारक का ध्यान आध्यात्मिकता की और बढ़ता है तथा धारक को स्वास्थ्य लाभ होता है.
विस्तृत विवरणजब हम रुद्राक्ष के बारे में चिंतन करते हैं, तो भगवान शिव की प्रत्यक्ष छवि आँखों के सामने आ जाती हैं. हमारे शास्त्रों में भिन्न-भिन्न प्रकार के रुद्राक्षों का वर्णन हैं. संसार में राजसी, तामसिक और सात्विक रूप में प्रत्यक्ष फल प्रदान करने वाला रुद्राक्ष ही हैं. सभी देवी-देवताओं के मंत्रों की साधना
विस्तृत विवरणरुद्राक्ष आम के पेड़ जैसे एक पेड़ का फल हैं. ये पेड़ दक्षिण एशिया में मुख्यत: जावा, मलेशिया, ताइवान, भारत एवं नेपाल में पाए जाते हैं. भारत में ये मुख्यत: असम, अरुणाचल प्रदेश एवं देहरादून में पाए जाते हैं. रुद्राक्ष के फल से छिलका उतारकर उसके बीज को पानी में गलाकर साफ किया जाता हैं.
विस्तृत विवरणरुद्राक्ष वह अदभुत वस्तु है जिसे करुना के सागर, संसार को विष की ज्वाला से बचाने वाले, उत्पति -पालन - विनाश के करता भगवान शिव स्वयं धारण करते हैं. रुद्राक्ष का अर्थ है - रूद्र का अक्ष अर्थात शिव के आंसू अर्थात रुद्राक्ष शिव स्वरूप ही हैं. रुद्राक्ष मानव के लिए अपने अंतर्मन
विस्तृत विवरणअसली रुद्राक्ष की पहचान करना कथन कार्य है क्योंकि एकमुखी और एकाधिक मुखी रुद्राक्ष महंगे होने के कारण नकली भी बना लिए जाते हैं. अधिक लाभ लेने के लिए कम मुखों वाले रुद्राक्षों में अतिरिक्त मुख की धारियां बना दी जाती हैं. रुद्राक्ष सही है या नहीं इस तथ्य
विस्तृत विवरणभारत वर्ष में तो रुद्राक्ष से सभी परिचित हैं. यह आस्था के केंद्र के साथ अनेकों प्रकार से उपयोगी हैं. आजकल तो यूरोप और अमेरिका के लोग भी रुद्राक्ष से परिचित हो चले है. उनमें भी भारतीय दर्शन और आध्यात्म के प्रति रूचि जागृत हुई है. परिणामस्वरूप वहां के निवासी भी बड़ी
विस्तृत विवरणसाबर मंत्रों में रुद्राक्ष की उत्पति-वर्णन-महिमा एक प्रकार से है : अकल सकल सुमेरु की छाया, शिव शक्ति मिल वृक्ष लगाया. एक डाल अगम को गई. एक डाल उतर को गई. एक डाल पश्चिम को गईं. एक डाल दक्षिण को गईं. एक डाल दक्षिण को गईं. एक दान आकाश को गईं. एक डाल पाताल को गईं.
विस्तृत विवरणधर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्राप्ति के लिए गृहस्थ आश्रम श्रेष्ठ कहा गया हैं. जो शुभ पाणिग्रहण पर निर्भर हैं. हमारे महाऋषियों ने भारतवर्ष की धार्मिक आवश्यकता तथा भौगोलिक स्थिति-परिस्थितयों को ध्यान में रखकर कुछ नियमों का प्रतिपादन किया, जिनमें
विस्तृत विवरणरुद्राक्ष भगवान् शिव प्रदात प्रकृति का अनुपम उपहार हैं. रुद्राक्ष शब्द की निष्पति संस्कृत के दो शब्दों से हुई है. रूद्र और अक्ष. \'अक्ष\' का तात्पर्य आशुतोष भगवान शिव की उस कल्याणकारी दृष्टि से है जो धारण करने वाले का पथ निर्बाध एवं निष्कंटक बनाती हैं. रुदाक्ष = रूद्र + अक्ष अर्थात शिव की आँख.
विस्तृत विवरणआंवले के बराबर रुद्राक्ष श्रेष्ठ, बेर के बराबर मध्य, चने के बराबर रुद्राक्ष निम्न कोटि का होता हैं. रुद्राक्ष समस्त अरिष्टों का नाश करने वाला, लोक में उतम सुख, सौभाग्य एवं समृद्धि दाता, संपूर्ण मनोरथों को सिद्ध करने वाला होता है. सामान्यता: एक से चौदह मुखी तक रुद्राक्ष पाए जाते हैं.
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