हमने पिछले अंक में आपको वास्तु में पंचतत्व, रेखागणित, अंक गणित व् रंगों का क्या महत्त्व हैं. इसके बारे में बताया था और अब वास्तु में और किन किन बातों को ध्यान रखना चाहिए. तथा हम क्या कर सकते है की जानकारी देंगे. हमने आपको अप्रैल माह के अंक में
विस्तृत विवरणनींबू की जड, उतरा फाल्गुनी नक्षत्र में लाकर व् इसे गाय के दूध में मिलकर निसंतान औरत को पिला देने से संतांकी प्राप्ति होती है.इस मंत्र से ७ बार जाप करें - ऊँ महावीराय नम:. चम्पा की जड़, हस्त नक्षत्र में लाकर बच्चे के गले में उक्त मंत्र को ७ बार पढ़ कर ऊँ महावीराय नम: मंत्र से धूप
विस्तृत विवरणवास्तु का अर्थ: वास्तु अर्थात किसी घर या स्थान में किसी भी वस्तु का उसके सही स्थान पर चयन करना. फेंगशुई भी वास्तु में इन्हीं चीजों पर अधिक ध्यान केन्द्रित करता हैं. वास्तु का वैज्ञानिक कारण यह है की उतर से दक्षिण की तरफ चुम्बकीय रेखा जा रही है तथा पूर्व से पश्चिम
विस्तृत विवरणवास्तुशास्त्र में भवन या गृह को प्राण या जीवात्मा के रूप में स्वीकारा गया है। इस में छुपी ज्ञान की सीमाएं अत्यंत विस्तृत व विशाल हैं, जिसकी एतिहासिकताएं वेद व मत्स्य पुराण जैसे ग्रंथों के विवरणों में देखी जा सकती है।
विस्तृत विवरणमानव शरीर इस सृष्टि के ही अंगभूत पंच तत्वों यथा पृथ्वी, जल आकाश, अग्नि और वायु ये पंच महाभूत नैसर्गिक ऊर्जाओं के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। हम इस धरा पर कहीं भी निवास करें, अपनी जीवन शैली को इन पंच तत्वों व नैसर्गिक ऊर्जाओं के अनुरूप ढालना अनिवार्य है। इसी में अंतर्निहित है, वैश्विक मांगल्य में वास्तुशास्त्र की भूमिका।
विस्तृत विवरणज्योतिष एवं वास्तु दोनों ही शास्त्रों में चार मुखय दिशाओं एवं चार उपदिशाओं अर्थात कुल आठ दिशाओं को मान्यता प्राप्त है। उन आठ दिशायें तथा उनसे संबंधित ग्रह एवं देवता का परिचय।
विस्तृत विवरणवास्तु के नियम सूर्य रश्मि, दिशाओं के तत्व पृथ्वी का झुकाव, वास्तु पुरूष की आकृति आदि पर आधारित हैं जो पूर्णतया वैज्ञानिक भी हैं।
विस्तृत विवरणप्रकृति द्वारा प्रदत पंचमहाभूत जिस प्रकार हमारे लिए उपयोगी है। उसी प्रकार पर्यावरण के लिए भी उपयोगी है। पृथ्वी के आवरण वायु, जल आदि में गतिशील परिवर्तन पर्यावरण है। जिस प्रकार हमारा शारीर अग्नि, पृथ्वी, वायु, जल और आकाश से मिलकर बना है, उसी प्रकार खेती-बाड़ी बनस्पति, पौधों व् वृक्षों के सर्वांगीण विकास के लिए इन पंचमहाभूतों की आवश्यकता होती है।
विस्तृत विवरणकुछ समय पहले पंडित जी को हिसार में एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी श्री पुरुषोतम जी ने अपने घर पर वास्तु निरिक्षण के लिये बुलाया। वहां जाने पर पता चला की व्यवसायी की पत्नी का सन २००६ में छोटी अंत का आपरेशन हुआ था जो प्राणघातक हो सकता था।
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