योग | फलित ज्योतिष

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जून 2011
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भंग हो केमद्रुम योग, तो बने राजयोग

केमद्रुम योग के बारे में अधिकांशतः इसके नकारात्मक पक्ष पर अधिक बल है यदि हम इसके सकारात्मक पक्ष का गंभीर पूर्वक विवेचन करें तो कुछ विशेष योगों की उपस्थिति में केमद्रुम योग भंग होकर राजयोग में परिवर्तित हो जाता है।

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अप्रैल 2011
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जन्म पत्रिका में ज्योतिषी योग

ज्योतिष एक दिव्य विद्या होने के साथ ज्ञान का अथाह सागर है इसमें ईष्वरोपासना की ओर आगे बढ़कर ईष्वरीय कृपा प्राप्त करने वाला व्यक्ति ही पारंगत हो सकता है। इससे संबंधित ज्योतिषीय योगों के बारे में जानने के लिए यह लेख पढ़िए।

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मार्च 2011
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राज्य कर्मचारी और कुछ विषिष्ट ज्योतिषीय योग

पदोन्नति, स्थानांतरण, निलंबन और सेवा समाप्ति जैसी चिन्ताएं सभी कर्मचारियों को परेषान करती हैं लेकिन राज्य कर्मचारियों के मामले में ऐसी स्थितियों के लिए जो ज्योतिषीय योग उतरदायी होते हैं उनके बारे में इस लेख में प्रकाष डाला गया है।

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फरवरी 2011
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जन्म पत्रिका में वकील योग

ज्योतिषीय दृष्टि से योगों के आधार पर वकील बनने का निर्धारण किया जा सकता है। ऐसे ज्योतिषीय योगों के बारे में जानने के लिए पढ़ि+ए यह लेख।

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जनवरी 2011
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चिकित्सक योग

एक सफल चिकित्सक बनने में किन ग्रहों का योग होता है। इस आलेख में प्रस्तुत है चिकित्सा व्यवसाय में सफलता दिलाने वाले ग्रह योगों का विवरण

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दिसंबर 2010
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जन्म पत्रिका में इंजीनियरिंग योग

इंजीनियरिंग में सफलता के लिए शनि मंगल, सूर्य आदि कारक ग्रहों का लग्न, चतुर्थ, पंचम, सप्तम, नवम व दषम भाव और इन भावों के स्वामी के साथ संबंध होना अति आवष्यक है।

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अगस्त 2010
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राजभंग योग

उच्च कोटि के राजयोग जहां फलित होते देखे गए हैं, वहीं दूसरी ओर इन्हीं राजयोगों का भंग होना भी फलीभूत हुआ है। ऐसा क्यों होता है, आइए कुछ कुंडलियों के माध्यम से इस विषय की तह तक पहुंचने का प्रयास करें।

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जुलाई 2010
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सूर्य का नीच भंग राजयोग

नवग्रहों में सूर्य राजसी ग्रह माना जाता है। मेष राशि में सूर्य उच्चस्थ होते हैं और तुला राशि में नीचस्थ। प्रस्तुत है सूर्य के नीच भंग राजयोग का कुंडलीय विश्लेषण।

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सितंबर 2009
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दुर्भाग्य कारक है केमद्रुम योग

केमद्रुम योग के बारे में प्राचीन ग्रंथों में अलग–अलग मत है लेकिन सभी का फल समान बताया गया है. अर्थात यह योग जातक के लिए साधारणतया अत्यंत अशुभ होता है. किन्तु कई बार ऐसा भी होता है की कुंडली में इस योग के होने पर भी जातक कों बहुत अधिक पीड़ा नहीं झेलनी पड़ती है....

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फरवरी 2008
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कौन बनते हैं आध्यात्मिक व्यक्ति

कुंडली के भाव ३, ६, १० तथा ११ को उपचय स्थान कहते है। खजान, संग्रह एवं संबंध अर्थात यही वह कारण है जो धरा पर मनुष्य को अधिक समय तक जीवित रहने व बार-बार जन्म लेने के लिए प्रेरित करता है। तृतीय भाव उपचय की प्रथम।

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