कहा जाता है – पहला सुख निरोगी काया और दूसरा सुख जेब में माया। यानी की सब काम बाद में, पहले शरीर को स्वसत्य बनाए रखने पर ध्यान दें। दिनचर्या में जो भी करें, वह स्वास्थ्य को बढाने वाला हो। स्वास्थ्य को नजर अंदाज करके कोई काम न करें
विस्तृत विवरणवर्तमान परिवेश में अपने शरीर को सही शेप में रखने व चेहरे कि खूबसूरती बढाने कि दिलचस्पी कुछ जयादा ही बढ़ जाती है। जहां चेहरे को खूबसूरत बनाने के लिए तरह-तरह के प्रसाधन बाजार में उपलब्ध हैं, वहीँ शरीर को सही शेप प्रदान करने के लिए भी बहुत से
विस्तृत विवरणयह विचार एकदम गलत है की सर नीचे टीकाकार उलटा खड़े होने वाले आसान को ही शीर्षासन कहते है। योगासनों में सबसे महत्वपूर्ण आसन होने के कारण ही इसका नाम शीर्षासन रखा गया है। शीर्ष शब्द का अर्थ होता है। श्रेष्ठ और उंचा यानी उच्च श्रेणी का। शीर्षासन जहां गुणकारी और श्रेष्ठ
विस्तृत विवरणभागदौड भरी दिनचर्या से जीवन में चिंता, तनाव, क्रोध और चिडचिडापन तेजी से बढता जा रहा है, जिससे मन अशांत होता जाता है। मन अशांत होने के कारण अनेक तरह के रोग जन्म ले रहे है, जिसमें से एक मुख्य रोग उच्च रक्तचाप है।
विस्तृत विवरणयोग अपने को जानने की एक ऐसी कला है, जिसके द्वारा शरीर, मन और आत्मा का शोधन होता है। इसका सरल अध्यास हमें हर प्रकार से स्वस्थ और चिंतनशील बनाता है। इसे आठ वर्ष के बच्चे से लेकर १०० वर्ष के वृद्ध व्यक्ति तक कर सकते है। यहाँ हम
विस्तृत विवरणयोग हमारी मानसिक व् शारीरिक शक्तियों को बढाने के साथ-साथ हमारे अंदर निहित शक्तियों को भी विकसित करता है। शरीर विभिन्न तंत्रों का समूह है, प्रत्येक तंत्र, विकसित करने के लिए हमारे ऋषि-मुनियों ने अनेक तरह के योग सुझाए है। विकसित स्नायु तंत्र भी
विस्तृत विवरणजब मन, बुद्धि और चित् की सम – वृति हो जाती है, तो उसे समाधि कहते है। इंद्रियों की समपुष्टता को भी समत्व कहते है। शरीर से लेकर आत्मा तक समत्व साधन करना योग का अभीष्ट है। छह वर्ष की आयु से सतर–अस्सी वर्ष की आयु तक के व्यक्ति योगाभ्यास कर
विस्तृत विवरणआज अधिकांश मनुष्यों का जीवन तनावों से भरा है। उनमें संकटों से जूझने की शक्ति लगातार क्षीण होती जा रही है। विचार व्यवस्थित न होने और एकाग्रता की कमी के कारण उनके जीवन का काफी हिस्सा बेकार के विचार और कल्पनाएं करने में नष्ट
विस्तृत विवरणशरीर को किसी एक मुद्रा या स्थिति में रखते हुए सुख प्राप्त करना आसन है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए आसन बहुत जरुरी है। यौगिक आसन अन्य शारीरिक व्यायामों की अपेक्षा पूरी तरह से वैज्ञानिक है। इनको भारतीय महर्षियों ने मानव जाति की
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