सार्वजनिक रूप से प्रचलित चिकित्सा पद्धतियों में एलोपैथिक, होम्योपैथिक आदि सर्वाधिक रूप से अपनाई जाती है। इनके अलावा भी अनेक प्रभावी चिकित्सा पद्धतियां हैं जिनके माध्यम स रोगों में शतप्रतिशत लाभ की संभावना रही है और सबसे बड़ी बात यह है कि उनके कोई पार्श्व प्रभाव भी नहीं होते।
विस्तृत विवरणएक्यूप्रेशर पद्धति अत्यंत ही प्रभावकारी मानी गई है तथा मिर्गी, अनिंद्रा, पक्षाघात, चक्ककर, हृदय पीड़ा या दिल के दौरे आदि की स्थिति में इस चिकित्सा के अत्यंत लाभप्रद व चमत्कारी फल देखे गए हैं।
विस्तृत विवरणप्रेशर देने से पहले कुछ सावधानियां बरतनी बहुत जरूरी है।
विस्तृत विवरणरेकी मनुष्य के मन एवं शरीर का संतुलन प्रस्थापित करने और मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य प्राप्ति का एक नैसर्गिक एवं सरल उपाय है।
विस्तृत विवरणस्फटिक बॉल को प्रयोग हेतु चुनने एवं जागृत, सक्रिय करने हेतु रेकी मास्टरों द्वारा कुछ क्रियाएं की जाती हैं जिनका विवरण इस प्रकार है-
विस्तृत विवरणमहामृत्युंजय यंत्र एवं मंत्र का प्रयोग, एक सात्विक प्रयोग है, अतः इससे केवल लाभ ही लाळा होता है। शरीर रक्षा के साथ बुद्धि, विद्या, यश और लक्ष्मी भी बढ़ती है।
विस्तृत विवरणप्राणायाम की विशिष्ट साधना द्वारा प्रत्येक प्रकार की समस्या, उलझन, विपरीत परिस्थितियों और निर्बलता के निर्मूलन के लिए सूझ-सुबुद्धि और परमात्म-बल अर्जित करना सहज संभव है।
विस्तृत विवरणसंगीत का हमारे स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। दुनिया भर में संगीत पर अध्ययन किए जा रहे हैं, जिसके समारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
विस्तृत विवरणतनाव व रोगों के शमन में मंत्रों का बड़ा योगदान है। तनाव एवं रोगों से मुक्ति पाने तथा जीवन को शक्ति संपन्न बनाने के लिए मंत्र साधना सर्वश्रेष्ठ है, इतना ही नहीं मानव जीवन की समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं मंत्र।
विस्तृत विवरणहमारे शरीर के सभी अवयवों का रंगों से संबंध है। यदि मानव शरीर में रासायनिक द्रव्यों के कारण रंगों का असंतुलन हो जाता है तो शरीर में बीमारी उत्पन्न हो जाती है।
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