Palmistry
Marriage-line-tells-the-happy-marriage
July 2011
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विवाह रेखा ही बता देती है विवाह सुख

हथेली में विवाह रेखा बहुत ही छोटी होती है परंतु व्यक्ति के जीवन में बहुत प्रभावशाली होती है। हाथ की रेखाओं का अध्ययन करते समय हम विवाह रेखा की उपेक्षा नहीं कर सकते। हृदय रेखा एवं जीवन रेखा की तरह यह रेखा इतनी गहरी एवं बड़ी नहीं होती। विवाह रेखा बुध की उंगली के नीचे शुरु होकर अनामिका उंगली की तरफ जाती है। यह हृदय रेखा के ऊपर छोटी उंगली के नीचे स्थित होती है।

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Hast-Rekha-Se-Jaanee-Career
April 2010
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हस्तरेखा से जानें कैरियर

सभी अंगुली में प्रायः तीन पोर होते हैं, और यदि यह ज्यादा कटे-फटे न हो तो अच्छी गुणवत्ता के व्यक्तित्व को दर्शाती है तथा सामान्यतः धनाढय योग बताती है। अंगूठे में प्रायः चार पोर हो सकते हैं और यह उच्च इच्छा शक्ति की द्योतक है। तर्जनी उंगली से गुरु पर्वत से होते हुए बुध पर्वत तथा कनिष्ठका उंगली के नीचे से जाती हुई रेखा को हृदय रेखा कहा गया है। हाथ में ठ से ठ दिखाया गया है। इससे जाती हुई रेखा को मस्तिष्क रेखा कहते हैं, जो हमारी सोच और अच्छे दिमाग का द्योतक है। । से म् को हृदय रेखा से दिखाया गया है। हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा के बीच का राहु का भाग कहलाता है। हाथ में ज्ञ से दर्शाया क्षेत्र राहु है।

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Vargaakaar-Hath
October 2010
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वर्गाकार हाथ

वर्गाकार हाथ वाले व्यक्ति अध्ययन करने तथा तरह-तरह के क्षेत्रों को जानने के इच्छुक रहते हैं। यह किसी के अधीनस्थ होकर कार्य नहीं कर सकते। दूरदर्शी तथा धैर्यवान होते हैं, इनकी आभा खूबसूरत होती है। अभिलाषी, मनोविश्लेषक तथा थोड़े आलसी भी होते हैं। क्रोध जल्दी आता है। इस आलेख में प्रस्तुत है वर्गाकार हाथ तथा वर्गाकार उंगलियों का संक्षिप्त वर्णन

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Sanjeevani-Va-Jeevan-Rekha
October 2010
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संजीवनी व जीवन रेखा

हस्तरेखा विज्ञान के अभ्यास से मानव जीवन में घटने वाली घटनाओं का पूर्वाभास हो जाता है। इसमें जो जितने गहरे गोते लगाएगा उसे अनुभव के उतने ही मूल्यवान मोती प्राप्त होगा। इसलिए यह सच है कि जो हाथ की रेखाएं कहती है, वह सत्य ही कहती है और जो भी हाथ की रेखाओं में रहस्य छिपा है वह अपने आप में प्रमाणिक होता है।

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palmistry-importance
April 2011
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जीवन रेखा का महत्व

हस्तशास्त्र में जीवन रेखा द्वारा आयु का निर्धारण किया जाता है। जीवन रेखा को पितृ रेखा या गोत्र रेखा आदि कई नामों से भी जाना जाता है। जिस प्रकार तीन नदियां मिलकर संगम बनाती है उसी प्रकार जीवन रेखा का उद्गम स्थान बृहस्पति क्षेत्र एवं अंगूठे के मध्य में होता हुआ मस्तिष्क रेखा से जुड़कर, गोलाई बनाते हुए होता है। जब यह रेखा न अधिक पतली न अधिक मोटी सुंदर व पुष्ट होकर शुक्र क्षेत्र को घेरती हुई मणिबंध के समीप तक पहुंचकर समाप्त होती है, तो ऐसा व्यक्ति स्वस्थ, दीर्घायु, ऐश्वर्य युक्त होकर अपना पूर्ण जीवन व्यतीत करता है।

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Shiv Shakti Kavach

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