अष्टकवर्ग विद्या की अचूकता व सटीकता का प्रतिशत सबसे अधिक है। सभी ग्रहों के अष्टकवर्ग के फलकथन के क्रम में इस बार शनि के अष्टकवर्ग के फल कथन की बारी है जिससे कर्म, नौकर, मजदूर, मेहनत, रोग बाधा, न्यायालय, आयु आदि विषय में विचार किया जाता है।
Read Moreअष्टम चंद्र यानि जन्म कुंडली में आठवें भाव में स्थित चंद्र। आठवां भाव यानि छिद्र भाव, मृत्यु स्थान, क्लेश'विघ्नादि का भाव। अतः आठवें भाव में स्थित चंद्र को लगभग सभी ज्योतिष ग्रंथों में अशुभ माना गया है और वह भी जीवन के लिए अशुभ। जैसे कि फलदीपिका के अध्याय आठ के श्लोक पांच में लिखा है कि अष्टम भाव में चंद्र हो तो बालक अल्पायु व रोगी होता है।
Read Moreजब दो ग्रह एक ही भाव में एक दूसरे के बहुत निकट होते हैं व दोनों ग्रहों की डिग्री में 10 से कम का अंतर होता है तो यह अवस्था ग्रह युद्ध की अवस्था कहलाती है। जिस ग्रह की डिग्री कम होती है वह ग्रह युद्ध में जीता हुआ माना जाता है व जिस ग्रह की डिग्री उन दोनों में अधिक हो वह ग्रह युद्ध में पराजित होता है। हमारे प्राचीन ज्योतिष के ग्रंथों में ग्रह युद्ध में पराजित ग्रह को ''खल'' की संज्ञा दी गई है। साथ ही यह भी माना गया कि इस खल ग्रह की दशा - अंतर्दशा में मनुष्यों को अत्यधिक शारीरिक व मानसिक कष्ट होता है।
Read Moreऋषि मुनियों ने बृहस्पति की कल्पना ऐसे पुरूष के रूप में की है जो बृहदकाय, विद्वान, सात्विक एवं मिष्ठानप्रिय है। बृहस्पति देव की कृपा के बिना किसी भी जातक का जीवन सुखी एवं संतुष्ट होना असंभव है। जन्मकुंडली में बृहस्पति कर्क, धनु, मीन राशियों तथा केंद्र 1,4,7,10 या त्रिकोण 5,9 भावों में स्थित होने पर शुभ फल देने वाला और योगकारक कहा गया है। आइए जानते हैं कि किस प्रकार जन्म व चंद्र कुंडली में शुभ प्रभाव में स्थित देव गुरु बृहस्पति जातक को विद्यावान, धनवान, सद्चरित्रवान एवं प्रतिष्ठित व्यक्ति बनाता है।
Read Moreमंगल का अर्थ शुभता, मांगलिकता, मधुरता, अनुकूलता से है। यह पराक्रम शौर्य, बल व साहस का प्रतीक है। यदि मंगल बली एवं शुभ प्रभाव में हो तो यह शक्ति, सामर्थ्य, भूसंपत्ति एवं वैभव देता है और व्यक्ति को तेजस्वी, बलवान, निपुण, आत्मनिर्भर, स्वाभिमानी, स्पष्ट व्यवहारवादी, पराक्रमी, नायक बनाता है। यदि मंगल निर्बल व अशुभ प्रभाव में हो तो जातक को क्रोधी, आलसी, धोखेबाज, मूर्ख, हठी, झगड़ालू, कुकर्मी बनाता है और जातक अपनी इन आदतों से अपना नुकसान कर जीवन को कष्टमय बना लेता है।
Read Moreउपग्रहों का स्पष्टीकरण 1. अप्रकाशित : उपग्रहों का संबंध या स्पष्टीकरण सूर्य से होता है। अर्थात् सूर्य के स्पष्ट भोगांश से इन उपग्रहों को सिद्ध करते हैं
Read Moreफ्यूचर पॉइंट के सौजन्य से शनि जीवन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण ग्रह है। इस आलेख में शनि की विभिन्न स्थितियों के फल का निरूपण किया गया है। शनि का अन्य ग्रहों के साथ साहचर्य, भावों और राशियों के साथ-साथ सभी लग्नों पर इसके प्रभाव के अतिरिक्त साढ़ेसाती व ढैय्या की चर्चा भी की गई है।
Read MoreThe customary practice of calculating the impact of mutual aspects of planets may lead to incorrect or totally different intrepretation of ground realities as it may be gathered from the example horoscope taken up here in the article for analysis because difference or wide gap between the longitude of such planets makes the real difference.
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