मंगलकारी ग्रह 'मंगल' को जन्मकुंडली के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम एवं द्वादश भावों में होने पर अमंगली होने का दोष लग जाता है। भारतीय ज्योतिष में मांगलिक दोष सर्वाधिक चर्चा का विषय है। क्योंकि यह दोष जातक के विवाह में विलंब, तलाक या घर परिवार में विघटन का कारण बन जाता है। परंतु मंगल पर शुभ ग्रहों का प्रबल प्रभाव होना या मंगल के अति निर्बल व अस्त होने पर मंगल दोष नगण्य सा हो जाता है। पति एवं पत्नी दोनों में मंगल दोष होने पर उसका समायोजन हो जाता है और दोष भंग हो जाता है। इसी तथ्य को कृतार्थ करते हुए इस शोध में चर्चा की गई है।
Read MoreIn the modern world of today everybody aspires to be prosperous and financially sound. Those, who are already well off, wish to maintain and upgrade their standards and work hard to get more and more. To fulfill our wishes, while we work hard, we also pray to Almighty to give us the desired means to achieve our goals.
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